Black Fungus in Bihar ll तेज़ी से फैल रही है ब्लैक फंगस महामारी, जानिये क्या करें क्या न करें ?

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना

बिहार में नीतीश सरकार ने ब्लैक फ़ंगस को एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट 1897 के तहत महामारी घोषित कर दिया है। इसकी वजह यह है कि प्रदेश में इसका संक्रमण काफ़ी तेज़ी से फैल रहा है। अगर देश के स्तर पर बात करें तो महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात समेत कई प्रदेशों ने भी ब्लैक फंगस को अपने यहां महामारी घोषित कर दिया है। भारत में अब तक 200 लोगांें की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है।

ब्लैक फ़ंगस के शिकार ज़्यादातर वे लोग हो रहे हैं जो कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इसमें कोरोना से ठीक हो रहे लोगों को आंखों से जुड़ी समस्या सामने आ रही है। यहां तक कि आंखें निकालने या जान जाने तक की नौबत आ रही है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में आंत में भी संक्रमण फैलने का मामला सामने आया है।

वैसे, डाॅक्टरों का कहना है कि अगर इसकी पहचान प्राथमिक चरणों में ही हो जाए तो इस मर्ज़ से एक या डेढ़ महीने में निजात मिल सकती है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस मर्ज़ के लिए ज़रूरी दवाएं बाज़ारों में उपलब्ध नहीं हैं। इसे देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने ब्लैक फं़गस के इलाज को आयुष्मान भारत के अंतर्गत लाने की मांग की है ताकि इसके शिकार मरीज़ों का आसानी से इलाज हो सके। सोनिया गांधी ने इस मर्ज़ में उपयोगी दवाओं की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ मुफ़्त इलाज की भी मांग की है।

हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेशवासियों के नाम जारी अपने एक संदेश में कहा है कि राजधानी के आईजीआईएमएस और पटना एम्स के साथ-साथ कई सरकारी और निजी अस्पतलों में ब्लैक फंगस की दवा उलब्ध कराई गई है।

इस बीच इंडियन काउंसिल आॅफ़ मेडिकल रिसर्च ने ब्लैक फं़गस को लेकर गाइडलाइन जारी की है।

आइए जानते हैं ब्लैक फंगस क्या है?

ब्लैक फंगस ऐसे लोगों को ज़्यादा प्रभावित करता है जो पहले से अन्य बीमारियों की दवा ले रहे हैं। ऐसे कोरोना मरीज़ों में इसके मामले आ रहे हैं, जिन्हें लक्षणों के इलाज के लिए स्टेराॅयड दिया गया था। स्टेराॅयड शरीर में इम्युनिटी पावर बढ़ाने का काम करता है।

ब्लैक फ़ंगस कोरोना से पीड़ित उन लोगों पर ज़्यादा असर डाल रहा है जो शुगर और कैंसर से पीड़ित हैं। कमज़ोर इम्युनिटी वालों को ख़तरा ज़्यादा है।

अब देखते हैं ब्लैक फ़ंगस के कौन-कौन से लक्षण हैं
ब्लैक फ़ंगस के कई लक्षण हैं। इनमें सिर दर्द, चेहरे पर दर्द, नाक बंद, आंखों की रौशनी कम होना या फिर दर्द होना शामिल हैं। इसके अलावा मानसिक स्थिति में बदलाव होना या फिर भ्रम पैदा होना, गाल और आंखों में सूजन, दांत दर्द, दांतों का ढीला होना भी लक्षण हैं। साथ ही, नाक में काली पपड़ी जमना, सांस लेने में तकलीफ़, खांसी और खून की उलटी होना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं।

अब जानते हैं ब्लैक फं़गस से बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें
जहां तक क्या करने का सवाल है तो-
खून में ग्लूकोज़ की मात्रा नियंत्रित रखें। स्टेराॅयड के इस्तेमाल पर निगरानी रखें। डाॅक्टर की दी हुई दवा समय पर लें। आॅक्सीजन लेने के दौरान स्टरलाइट पानी का इस्तेमाल करें। धूल भरी जगह पर जा रहे हैं तो मास्क ज़रूर लगाएं। घर के अंदर और बाहर साफ़-सफ़ाई रखें। बाग़बानी या खेती के काम के बाद खुद को पूरी तरह साफ़ कर लें।

जहां तक क्या न करने का सवाल है तो-
ब्लैक फ़ंगस का कोई भी लक्षण दिखता है तो अनदेखी बिलकुल न करें, तुरंत डाॅक्टर से सलाह लें। बंद नाक के मामले को नज़रअंदाज़ न करें। इसे साइनेसाइटिस का मामला न समझें। ख़ासकर कोरोना मरीज़ों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। फ़ंगल का पता लगाने के लिए उपयुक्त जांच का सहारा लेना चाहिए। अगर ब्लैक फं़गस का पता चलता है तो इलाज शुरू करने में देरी बिलकुल न करें।

हेल्थ डेस्क, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना

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