कोरोना से मरने वाले को न दिखाने का प्रोटोकाॅल मुसीबत, जिंदा को मुर्दा बता सौंपी दूसरे की लाश

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
बिहार में कोरोना से जान गंवाने वाले मरीज को परिजनों को भी न दिखाने का कथित प्रोटोकाॅल रविवार को बाढ़ के एक परिवार के लिए भारी मानसिक प्रताड़ना का कारण बन गया। उस परिवार को किसी और की लाश दे दी गयी जबकि उसका मरीज जिंदा है। यह घटना पीएमसीएच, पटना की है।
दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन यह कहता है कि शव देने से पहले मरीज की पहचान करानी है। अब अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि इसकी जांच होगी कि ऐसा क्यों नहीं कराया गया। तो क्या कोरोना से हुई मौत वाले मरीज को नहीं दिखाने का प्रोटोकाॅल नहीं है? यह एक अनुत्तरित सवाल है। इधर, पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने पीएमसीएच के अधीक्षक और प्राचार्य से जांच रिपोर्ट मांगी है।
इस प्रोटोकाॅल के कारण बाढ़ के चुन्नू को मरा बताकर एक पूरी तरह से पैक लाश परिवार को इस सख्त हिदायत के साथ सौंपी गयी कि इसे किसी भी हाल में खोले बिना अंतिम संस्कार कर देना है। यह लाश बाद में पूर्णिया के राजकुमार भगत की निकली। इसका पता तब चला जब चुन्नू की पत्नी ने जिद कर ली कि एक बार चेहरा दिखा दिया जाए। जब चेहरा दिखाने के लिए पैक को खोला गया तो पत्नी चिल्ला चिल्लाकर कर कहने लगी कि यह तो किसी और की लाश है।
इस बारे में पीएमसीएच के अधीक्षक डा. आईएस ठाकुर का कहना है कि हेल्थ मैनेजर अंजलि की गलती से ऐसा हुआ और उसे इस कारण बर्खास्त कर दिया गया है।
चुन्नू की पत्नी के यह कहने पर कि यह लाश किसी और की है, घर के दूसरे लोगों ने भी लाश देखी। इसके बाद सब भागे-भागे पीएमसीएच पहुंचे। उन्होंने पीएमसीएच के पुलिस आउटपोस्ट को इसकी जानकारी दी।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि बाढ़ के मोहम्मदपुर के रहने वाले चुन्नू कुमार कोरोना से संक्रमित होने के बाद 11 अप्रैल को पीएमसीएच में भर्ती कराये गये थे। उसी दिन पीएमसीएच प्रशासन ने उन्हें मृत बता दिया और इसके बारे में कागज भी दिया। परिवार के पास चुन्नू की लाश को सौंपने का कागज भी है।
दूसरी ओर जिस मरीज की मौत हुई वह पूर्णिया के राजकुमार भगत थे। उन्हें गंभीर हालत में पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। अंदाजा लगाया जा रहा है कि मरीजों को शिफ्ट करने और बेड बदलने में यह चूक हुई है। सवाल यह भी है कि अगर चुन्नू की पत्नी ने लाश नहीं देखी होती तो…।

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