छपी-अनछपी: अदानी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राय मांगी, डॉक्टर-नर्सों की अपने जिलों में होगी तैनाती

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। गौतम अडानी के शेयरों के घोटाले के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जिसकी खबर प्रमुखता से ली गई है। बिहार में अस्पतालों से डॉक्टरों के गायब रहने की शिकायत आम है क्योंकि वह अक्सर दूसरे जिलों से आकर नौकरी करते हैं। अब उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि उनकी तैनाती उनके अपने जिलों में की जाएगी। इस बयान को अखबारों ने काफी अहमियत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोहरा समाज के शीर्ष गुरु से मिले हैं जिसकी तस्वीर भास्कर ने पहले पेज पर ली है।

जागरण की सबसे बड़ी सुर्खी है: अदानी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व सेबी से मांगी राय। हिन्दुस्तान ने लिखा है:निवेशकों के हित की रक्षा कैसे होगी: सुप्रीम कोर्ट। सुप्रीम कोर्ट ने हिंडबर्ग रिपोर्ट के बारे में जांच की मांग वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। रिपोर्ट प्रकाशन के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट आई थी। वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में हिंडबर्ग रिपोर्ट की सामग्री की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में समिति के गठन की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने भारतीय निवेशकों की सुरक्षा के बारे में चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि हम कैसे सुनिश्चित करें कि भारतीय निवेशक सुरक्षित हैं, ऐसा भविष्य में नहीं होगा। कोर्ट ने नियामक तंत्र में सुधार के सुझावों पर केंद्र और सेबी के विचार मांगे।

डॉक्टरों को मिलेगा होम डिस्ट्रिक्ट

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: डॉक्टर-नर्सों की गृह जिलों में होगी तैनाती। राज्य के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर व नर्सों की गृह जिले में पोस्टिंग होगी। उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव ने राज्य के 24 जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान की शुरुआत करते हुए शुक्रवार को यह घोषणा की। उपमुख्यमंत्री ने ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में खुद विभागीय अधिकारियों के साथ दवा खाकर अभियान का आगाज किया। इस मौके पर विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास तभी सार्थक होगा, जब हम टीम के रूप में काम करें। सरकार की कोशिश है कि चिकित्साकर्मियों को कोई परेशानी नहीं हो। इसके लिए डॉक्टर व नर्सों की गृह जिले में तैनाती की जाएगी।

सरकार के 18 हज़ार जल स्रोतों पर कब्ज़ा

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: 38 जिलों के 18,000 जलस्रोतों की 3.65 लाख एकड़ जमीन पर लोगों ने किया कब्जा। अखबार लिखता है: 100 साल तक सरकार ने अपनी जमीन खोजी नहीं। जल जीवन हरियाली योजना 2019 में शुरू हुई तो आहर, पईन, कुआं, तालाब, पोखरे सरीखे जलस्रोत खोजे जाने लगे। अंग्रेजी राज़ में 1890 से 1920 के बीच के बीच हुई कैडस्ट्रल सर्वे का नक्शा निकाला गया तब पता चला कि 38 जिलों में इतनी बड़ी संख्या में जलस्रोतों की जमीन पर कब्जा कर लोगों ने मकान, दुकान आदि बना लिया है।

मोदी की मुलाक़ात सैयदना से

भास्कर ने पहले पेज पर फोटो स्टोरी दी है: प्रधानमंत्री ने बोहरा समाज के एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के नए कैंपस का उद्घाटन किया। मुंबई की इस खबर में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैंने आपका विडिओ देखा, मुझे एक शिकायत है, उसमें मुझे आपने बार बार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री संबोधित किया। मैं यहाँ पीएम या सीएम नहीं, आपके परिवार के सदस्य के तौर पर आया हूँ। मोदी ने बोहरा समाज के प्रमुख सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन से मुलाकात की और उनके साथ परंपरागत रोटी भी बेली।

ब्राह्मण नहीं, पंडित कहा था: भागवत

भास्कर की एक सुर्खी है: मैंने कभी ब्राह्मण नहीं कहा, पंडित कहा, यह किसी भी जाति का हो सकता है: भागवत। जागरण ने सुर्खी लगाई है: भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए काम कर रहा संतमंत: भागवत। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आजकल भागलपुर में हैं और उन्होंने यह बयान वही दिए हैं। महर्षि मेंहीं आश्रम में शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संतों के बीच बैठकर लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान आचार्य महर्षि हरिनंदन परमहंस जी महाराज और महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल भी मौजूद रहे। एक स्कूल में शुक्रवार को परिवार मिलन कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैंने कभी ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, मैंने पंडित शब्द का उच्चारण किया था। यह किसी भी जाति का हो सकता है। पंडित उसे कहते हैं जो बुद्धिमान। कुछ दिनों पहले भागवत ने पंडितों द्वारा लोगों को जातियों व अलग अलग वर्गों में बांटने का बयान दिया था जिस पर काफी विवाद हुआ था।

कुछ और सुर्खियां

  • नीतीश बोले- केंद्र सरकार ने हमारी बात नहीं सुनी, कोई बात ही नहीं कर रहा, संसद में पूछे सवाल का जवाब भी नहीं दे रहा
  • लालू 76 दिनों के बाद आज सिंगापुर से भारत लौटेंगे
  • हज के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू, बिहार का कोटा अब बढ़कर 14042
  • वकालत के लिए बीसीआई को परीक्षा लेने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
  • विकास वैभव मामले में नीतीश ने दिए जांच के आदेश, कहा अफसर का काम ट्वीट करना नहीं है
  • होमगार्ड डीजी ने आईजी वैभव को अनुशासनहीनता का नोटिस दिया, 24 घंटे में जवाब मांगा
  • राजधानी पटना की 90 फ़ीसदी ट्रैफिक लाइट खराब, सिर्फ दिखाने को हैं जेबरा क्रॉसिंग
  • गहलोत विधानसभा में पढ़ गए पिछले वर्ष का बजट, सीएम की माफी के बाद हुआ भाषण
  • गूगल की 20 साल बादशाहत को नए चैटजीपीटी से खतरा बढ़ा, लोगों का रुझान नए विकल्पों में विज्ञापन से कमाई गिर रही
  • रेवेन्यू बढ़ाने के लिए सरकार का फरमान, दिन में रजिस्ट्री रात में होगी इसकी जांच

अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सैयदना के साथ प्रसारित तस्वीर देखने में जितनी अच्छी लगती है उसके पीछे की कहानी उतनी ही दुखदाई है। मुंबई का बोहरा समाज कुरान और हदीस पर ईमान रखने वाला समुदाय ही है लेकिन अपने कुछ सांस्कृतिक पहचान के वजह से यह एक छोटे से समूह में सिमटा हुआ है। इसके बारे में बहुत सारी टिप्पणियां की जाती है इसके समाज से बाहर निकालने की नीति कोर्ट पे बहस रही है लेकिन ऐसा माना जाता है कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में इस समूह ने अच्छा काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी और इनके पैतृक संगठन आरएसएस की कोशिश रही है कि मुसलमानों के बीच छोटे-छोटे समूहों से मिलकर उनकी एक राय नहीं बनने दी जाए और वे किसी सामूहिक शक्ति के रूप में सक्रिय नहीं हो पाएं। यानी फूट डालो और राज करो की नीति चल रही है। इससे पहले पसमांदा मुसलमानों को भी अलग से संबोधित करने के पीछे यही मंशा थी, हालांकि जब उन्हें एससी का दर्जा और दूसरे हक देने की बात आती है तो प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी दोनों चुप्पी साध लेते हैं। बोहरा समाज और उनके सैयदना के लिए भी यह सोचने की बात है कि वे प्रधानमंत्री मोदी से अपनी निकटता को मुसलमानों के प्रति नफरत के माहौल को कम करने में कितना इस्तेमाल कर पाते हैं।

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