ओवीसी का भाषण अच्छा होता है

समी खान की सीमांचल डायरी

अमौर बिहार विधसनसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण सीटों में एक है। यहां से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान उम्मीदवार हैं। उनके सामने हैं कांग्रेस के निवर्तमान विधायक अब्दुल जलील मस्तान और बीजेपी की…।

अमौर जाने के लिए किशनगंज से पूर्णिया की बस से बायसी उतरना होता है। शाम ढलने लगी है क्योंकि मेरी बस ने दालखोला में काफी वक्त ले लिया था।

बायसी मोड़ पर ऑटो लेकर अमौर पहुंचना किसी पार्टी का टिकट लेने से कम नहीं। मैंने ऑटो ड्राइवर से कहा कि 13 लोग सवार हैं तो उसने मेरी बात का खंडन करने के लिए कहा कि हमको काहे जोड़ रहे। खैर, आगे की सीट पर ड्राइवर के अलावा 4 लोग। बीच में और पीछे 4-4 सवारी और।

मोड़ पर ही पता चल जाता है कि यहां रुपिया नहीं टाका बोलना है। ऑटो वाले से मैं पूछता हूँ कि क्या सब बांग्ला बोल रहे हैं तो उसका जवाब मिलता है, नहीं। हम सुरजापुरी बोलते हैं।
आगे की सीट पर बैठने के बाद इस बात का पूरा इंतेजाम हो गया था कि बदन-हिलाना डुलाना नहीं है। इसलिए कलम से कुछ नोट करना मुश्किल था। मुंह चला सकते थे और सारी बात मन में नोट करना था।

यहां पॉलिटिक्स पर बात करने में बहुत देर नहीं लगी। ड्राइवर ने कहा कि काम तो किया है। बिजली शाम में कटती है लेकिन मिलती है। सड़क ठीक है। मगर अगले ही पल उसने कहा कि मगर अब बदलना चाहिए।

मैंने पूछा कि क्यों बदलना चाहिए। जवाब मिला-अब जुआ (युवा) को भी मौका देना चाहिए।
लेकिन पहले जिसने काम किया उससे दिक्कत क्या है? उसका जवाब है- बच्चा सब को सही से पढ़ाई नहीं मिलती और डॉक्टर भी सही से काम नहीं करते। और बाढ़ में कोई नहीं आया पूछने….मर रहे कि बच रहे।

मगर युवा नेता क्या करेगा? जवाब सुनिए- बोला है नौकरी देगा। देगा कि नहीं देगा ई तो नहीं कह सकते। लेकिन बोला है त एक चांस देना चाहिए।

मैंने पूछा कि यहां से कौन लड़ रहा? सब तो पतंगे बोल रहा।
और? हाथ भी है, फूल भी है।
किस नेता का भाषण सही लगता है? ओवैसी का।
क्यों? क्योंकि बोला है बड़ा अस्पताल देगा।
और? बढ़िया कॉलेज भी।
और कुछ? नौकरी भी बोला है मिलेगा।
लॉक डाउन में कोई दिक्कत हुई? मेरे इस सवाल का बहुत सधा हुआ जवाब मिलता है। दिक्कत तीन महीने हुई लेकिन दिक्कत तो पूरी दुनिया में हुई है।

मेरे बगल में और ड्राइवर के बगल में भी पतंग वाले लोग थे। मैंने ड्राइवर से पूछा कि वोट किसको पड़ेगा। उसने फिर वही बात दोहराई सब तो पतंग बोल रहा, लेकिन…।

लेकिन क्या? उसने कहा कि बोलता है सब कुछ और करता है कुछ और। मेरा भाई बोला कि फूल पर वोट देना है। मैंने कहा कि मेरा मन जिसको करेगा उसी को वोट देंगे।

अब मुझे लगा इनका नाम पूछा जाए। मनोज कुमार।
और? हमलोग राय हैं।
मतलब? हरिजन।
यही बातचीत करते हम अमौर पहुंच गए। मैंने उसे किराया दिया और उतर गए।

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