छपी-अनछपी: मोदी के तंज़ पर खड़गे बोले- इंडिया के लिए कटु शब्द निकाल रहे, आज भारी बारिश मुमकिन

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। देशभर में 508 रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य की आधारशिला रखने के बाद एक समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी गठबंधन पर तंज़ किया तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बोले कि वह ‘इंडिया’ के लिए कटु शब्द निकाल रहे हैं। इससे जुड़ी खबर सभी अखबारों में पहले पेज पर है। पटना सहित बिहार के 10 जिलों में आज भारी बारिश के अनुमान को अच्छी कवरेज मिली है। बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद में चल रहे सर्वे के बारे में लगातार किए जा रहे दावों को भी प्रमुख स्थान मिला है।

भास्कर की सुर्खी है: I.N.D.I.A पर सियासत तेज। इसके तहत दो बयान दिए गए हैं। 1. आज देश हर बुराई के लिए कह रहा क्विट इंडिया: मोदी। 2. आपकी ज़ुबां से इंडिया के लिए कटु शब्द निकल रहे: खरगे।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में विपक्ष का एक धड़ा न काम करता है, न करने देता है। देश ने संसद की नई बिल्डिंग बनवाई, कर्तव्य पथ बनवाय, नेशनल वॉर मेमोरियल बनवाया तो हर बार विपक्ष ने इनका विरोध किया। उन्होंने कहा कि आपको 9 अगस्त याद है न। उसी दिन ऐतिहासिक क्विट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत हुई थी। इसी से प्रेरित होकर आज पूरा देश हर बुराई के लिए कह रहा है क्विट इंडिया। इसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री जी आपकी वाणी से अब इंडिया के लिए भी कटु शब्द निकल रहे हैं। मणिपुर हिंसा पर आप 3 महीने में काबू नहीं पा पाए। हरियाणा में जो हुआ वह देश ने देखा। आप की सरकार और संघ परिवार के लोग भाई को भाई से लड़वा रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी, दलित उत्पीड़न खत्म करना आपकी सरकार के लिए असंभव लगता है। आपको जो 75 साल याद नहीं आया वह क्विट इंडिया अब याद आ रहा है।

भारी बारिश की चेतावनी

हिन्दुस्तान की खबर है: पटना समेत राज्य के 10 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी। राज्य में अगस्त में मानसून की सक्रियता बढ़ी है। अगले दो-तीन दिनों तक राज्य भर में कहीं भारी, कहीं मध्यम तो कहीं आंशिक बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने रविवार को दस जिलों में भारी या बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आठ जिलों दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया व भागलपुर में बहुत भारी वर्षा को लेकर औरेंज अलर्ट, जबकि दो जिलों सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर में भारी वर्षा को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे में क्या मिला

भास्कर की सुर्खी है: गुंबदों के नीचे मंदिर के शिखर जैसे ढांचे मिले। हिन्दुस्तान यह खबर है: ज्ञानवापी में व्यास जी के तहखाने गुंबद का सर्वे। ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के तीसरे दिन रविवार को एएसआई टीम की जांच मस्जिद के गुंबदों, व्यास जी के तहखाने में मिले मंदिरों के अवशेषों एवं आकृतियों पर केंद्रित रही। इन सभी की कई पहलुओं से मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी हुई। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि रविवार को ज्ञानवापी परिसर की चारो दिशाओं, दीवारों और सतह की मापी पूरी हो गई। इधर, मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता मुमताज अहमद ने रविवार को कहा कि सर्वे और मस्जिद के संबंध में अफवाह फैलाई गई है। सर्वे में कोई भी मूर्ति या त्रिशूल नहीं मिला है। शनिवार को हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि सर्वे में मूर्ति और त्रिशूल के साथ ही हिंदू प्रतीक चिह्न मिले हैं। हालांकि, इस संबंध में एएसआई ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

मणिपुर की हालत बेकाबू

हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर खबर दी है: मणिपुर में बेकाबू भीड़ ने डेढ़ दर्जन घर फूंके। मणिपुर में हिंसा का दौर जारी है। शुक्रवार रात तीन लोगों की हत्या के बाद शनिवार शाम फिर से हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। इंफाल वेस्ट जिले में बेकाबू भीड़ ने 15 घरों में आग लगा दी। वहीं राज्य में दस और केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया गया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि लांगोल गेम्स गांव में आक्रोशित भीड़ सड़कों पर उतर आई, जिसे तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की जांघ में गोली लगी। वहीं, इंफाल ईस्ट जिले के चेकॉन इलाके में भी हिंसा हुई है, जहां एक बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान को आग के हवाले कर दिया गया।

फौजियों से पहचान पत्र की जांच

भास्कर की खबर है: इंफाल में महिलाएं फौजियों का पहचान पत्र जांच रहीं। मणिपुर में बेलगाम हिंसा के बीच शांति बहाली की राह और कठिन हो रही है। राज्य की राजधानी इंफाल में आने वाले सभी रास्तों को मैतेई महिलाओं के संगठन मेइरा पाइबी ने रोक दिया है। इन महिलाओं ने इंफाल में आने वाले रास्तों की एंट्री पर बाकायदा चेक प्वाइंट बनाए हैं। यह महिलाएं इंफाल में आने वाले सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वाहनों के काफिले को घेर कर फौजियों के आई कार्ड जांच रही हैं।

कुछ और सुर्खियां

  • पाकिस्तान में ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त, 30 लोगों की मौत
  • अगले साल हज के लिए अक्टूबर से जमा होगा आवेदन
  • ज़िलों में जाति आधारित गणना पूरी मुख्यालय में पहुंची रिपोर्ट, इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
  • दिल्ली बिल पर राज्यसभा में आज हंगामे के आसार
  • नूंह शोभा यात्रा पर 3 मंजिला होटल पत्थर फेंकने के आरोप में बुलडोजर से गिराया गया
  • पीएफ़आई के मामले में एनआईए ने एक और संदिग्ध शाहिद रजा को गिरफ्तार किया

अनछपी: बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी एएसआई द्वारा सर्वे कराया जाना विवाद का विषय रहा है। हालांकि निचली अदालत से दिए गए सर्वे के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने से इनकार करने के बाद यह काम दोबारा शुरू किया गया था। अभी एएसआई ने अपनी कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है लेकिन वहां से धार्मिक प्रतीकों के चिन्ह के मिलने के दावे शुरू हो गए हैं। हैरत की बात यह है कि जो काम अदालती देखरेख में हो रहा है उसकी रिपोर्ट जारी हुए बिना ऐसे दावे किए जा रहे हैं और अखबारों में उन्हें काफी प्रमुखता मिल रही है। अखबार भी एकतरफा दावे छापे जा रहे हैं और बिल्कुल संयम नहीं बरत रहे हैं। अखबारों के अलावा टेलीविजन और अन्य माध्यमों पर भी उन दावों को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। अखबारों और अन्य माध्यमों के संपादकों से यह उम्मीद की जाती थी कि वह  अपुष्ट दावों को ज्यादा तवज्जो नहीं देंगे और अगर कोई दावा छापते हैं तो दूसरे पक्ष का भी बयान लेंगे लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। ऐसे दावों से देश में एक उन्माद पैदा होता है और यह अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि मीडिया ऐसे उन्माद को बढ़ावा देने में बराबर की हिस्सेदार बन रहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी है और यह समझ में आने वाली बात नहीं है कि एएसआई की रिपोर्ट अदालत में पेश होने से पहले कैसे लीक हो रही है या अगर रिपोर्ट लीक नहीं हो रही है तो उसके बारे में दावे कैसे मीडिया में आ रहे हैं? मीडिया ने पहले से ही ज्ञानवापी मस्जिद के आगे मस्जिद लगाना बंद कर दिया है और जैसा के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान था वैसा ही मीडिया कर रहा है। योगी आदित्यनाथ ने जब यह बयान दिया था तब भी उस पर सवाल हुए थे और अब मीडिया मस्जिद नहीं लिख रहा है तो उस पर भी सवाल होने चाहिए। सवाल सिर्फ इतना है कि ज्ञानवापी मस्जिद इस समय अदालत की नजर में एक मस्जिद है तो फिर उसे मस्जिद लिखने से परहेज क्यों।

 

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