छपी-अनछपीः मस्जिद को मंदिर बनाने का रास्ता? सुलगती हाफ पैंट पर आरएसएस गरम

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। ज्ञानवापी मस्जिद बिहार नहीं, बनारस में है लेकिन बिहार के अधिकतर हिन्दी अखबारों में इसके बारे में जिला अदालत का फैसला सबसे बड़ी खबर है। उधर कांग्रेस पार्टी द्वारा सुलगती हाफ पैंट की तस्वीर से आरएसएस और भाजपा गुस्से में सुलग रही है। यह खबर भी प्रमुखता से छपी है लेकिन पहले यह खबर पढ़िए कि बिहार की सिविल अदालतों में 7692 पदों पर बहाली होगी।
हिन्दुस्तान ने खबर दी है कि बिहार के सिविल कोर्ट में 7692 पदों पर निुयक्ति होगी। इसके लिए आवेदन 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक दिये जा सकते हैं। जिन पदों पर बहाली होनी है उनमें क्लर्क के लिए 3325, स्टेनोग्राफर के लिए 1562 और कोर्ट रीडर के लिए 1132 वैकेंसी है। इसके लिए वेबसाइट पर अधिक जानकारी ली जा सकती है।
हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर हैः जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का अध्ययन शुरू। यह काम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मानकों के आधार पर किया जा रहा है। इसमें इलाज के अलावा इलाज में मदद की सेवाओं का आकलन किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट 15 सितंबर को सौंपे जाने की उम्मीद है।
प्रभात खबर की पहली खबर हैः शृंगार गौरी पूजा पर होगी सुनवाई। जागरण की सबसे बड़ी सुर्खी हैः ज्ञानवापी मंे शृंगार गौरी की पूजा का केस सुनवाई योग्य। भास्कर ने लिखा हैः ज्ञानवापीः हिन्दू पक्ष के दावे में दम। हिन्दुस्तान की हेडलाइन हैः ज्ञानवापी-शृंगार गौरी केस अदालत सुनेगी।
यह मामला पांच हिन्दू महिलाओं द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शंृगार गौरी की पूजा के लिए प्रार्थना पत्र को सुनवाई योग्य नहीं मानने की अर्जी का है। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने इस प्रार्थना पत्र को सुनवाई के लायक मानने का फैसला दिया है। मस्जिद की इंतजामिया कमेटी हाईकोर्ट जाएगी। जिला अदालत में इस बारे मंे अगली सुनवाई 22 सिंतबर को है।
जागरण ने इस मामले में पक्ष-विपक्ष के तर्क हाइलाइटर्स में दिये हैं। मस्जिद पक्ष की दलीलों में कहा गया है कि चूंकि प्रार्थना पत्र में दर्शन-पूजन के अधिकार की मांग पूरे हिन्दू समाज के लिए की गयी है इसलिए सुनवाई स्थानीय अदालत में नहीं की जा सकती। ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। वक्फ एक्ट के तहत मुकदमे की सुनवाई सिविल अदालत में नहीं हो सकती। इसके अलावा दीन मोहम्मद बनाम सरकार 1936 के मुकदमे में अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद को मस्जिद मानते हुए नमाज का अधिकार दिया है जहां वर्षाें से नमाज हो रही है। इसलिए पूजा अधिनियम 1991 लागू होता है।
जागरण के अनुसार मंदिर पक्ष ने कहा कि काशी विश्वनाथ एक्ट 1993 में परिसर को बाबा विश्वनाथ के स्वामित्व का हिस्सा माना गया। इसलिए एक्ट के खिलाफ जो भी फैसले हुए वे शून्य हैं। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद को इस आधार पर वक्फ की संपत्ति मानने से इनकार करने की दलील दी कि इसका कोई मालिक नहीं है।
जागरण ने पहले पेज पर एक बड़ी सी खबर दी हैः कांग्रेस ने ’जलते गणवेश’ का फोटो किया ट्वीट। गणवेश यानी यूनिफाॅर्म। इसमें लिखा हैः 145 दिन और। यह ट्वीट वास्तव में कांग्रेस के ’भारत जोड़ो यात्रा’ से जुड़ा है। इस यात्रा की अगुवाई राहुल गांधी कर रहे हैं। इसमें लिखा हैः भारत को नफरत की जंजीरों से मुक्त करने और भाजपा-आरएसएस द्वारा किये गये नुकसान की भरपाई के लिए हम एक-एक कमद आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा ने इसे हिंसा भड़काने की साजिश करार दिया है। आरएसएस के सह कार्यवाह मदनमोहन वैद्य ने कहा है कि राहुल गांधी के ’बाप-दादा’ ने भी इसी तरह से आरएसएस का तिरस्कार किया था। वैसे, संघ का कहना है कि उसकी यूनिफाॅर्म में हाफ पैंट की जगह फुल पैंट ने ले ली है।
कल ही आरएसए का एक बड़ा प्रोग्राम कांग्रेस के राज वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायगढ़ में खत्म हुआ है। इस तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक में प्रमुख रूप से स्कूल-काॅलेजों में हिन्दुत्व की पढ़ाई की मांग की गयी। जागरण और भास्कर में यह खबर प्रमुखता से छपी है।
अनछपीः ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में अदालती फैसले की खबर देते हुए भास्कर ने लिखा हैः हिन्दू पक्ष जीता तो मंदिर का रास्ता होगा साफ। इसके अनुसार 1991 का प्लेसेज आॅफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले जो धर्मस्थल जैसा था, वैसा ही रहेगा। कोर्ट ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में यह एक्ट लागू नहीं है। इसलिए अब कानूनी लड़ाई का रास्ता साफ हो गया है और हिन्दू पक्ष मस्जिद को मंदिर बनाने की लड़ाई लड़ेगा। इसमें यह भी बताया गया है कि हिन्दू पक्ष मस्जिद की एएसआई से सर्वे की मांग करेगा। अखबारों के रवैये से यह साफ है कि वे ज्ञानवापी मस्जिद को अब ज्ञानवापी या ज्ञानवापी परिसर लिख रहे हैं। दूसरी बात यह है कि वह मंदिर का दावा करने वालों के लिए जनमानस को यह बता रहे हैं कि हिन्दू दावे में दम है। इसमें यह बात भी कही जा रही है कि मस्जिद को मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो रहा है।

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