2500 मदरसों में दी जा रही किशोर-किशोरियों को वैज्ञानिक सोच की शिक्षाः जमां

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
पटना। हज भवन, पटना के पास स्थित मौलाना मजहरुल हक आॅडिटोरयिम में एक अगस्त से मदरसों के प्रिंसिपल के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम चल रहा है जो पांच अगस्त तक चलेगा। इस कार्यक्रम के शुभारंभ कार्यक्रम में बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमां खान ने बताया कि 50 मदरसा संसाधन केन्दों के जरिए राज्य के 2500 मदरसों में तालीम पा रहे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच और वैज्ञानिक मिजाज को इस्लामी परिप्रेक्ष्य में सुदृढ़ किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के लिए 7 हजार से अधिक मदरसा शिक्षकों को नयी पेडागोजी यानी शिक्षाशास़्त्र में ट्रेनिंग दी जाएगी।
वर्ष 2020 में शुरू हुए इस कार्यक्रम का नाम तालीम-ए-नौबालिगान है यानी यह कार्यक्रम मदरसा के किशोर-किशोरियों के लिए है। यह कार्यक्रम यूएनएफपीए यानी संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रकोष्ठ के तहत चल रहा है। इसका उद्देश्य मदरसों और स्कूलों की बीच की दूरी को समाप्त करना है।
इस अवसर पर बिहार के विकास आयुक्त आमिर सुबहानी ने कहा कि तालीम-ए-नौबालिगान कार्यक्रम मदरसों के इस्लामी स्वरूप के अनुरूप विद्यार्थियों और शिक्षकों को समकालीन और भविष्य की स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने के लायक बनाएंगे। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों के लिए साझीदारी को बेहद जरूरी बताया। वर्तमान में इसके लिए यूएनएफपीए के अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया और मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय को भी जोड़ा गा है।
इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की सचिव सफीना ए.एन. ने कहा कि मदरसों में तालीम हासिल करने वालों में लगभग 75 प्रतिशत लड़कियां हैं। उन पर भी इस कार्यक्रम में खास ध्यान दिया गया है। इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक डा. एएए फैजी और मदसरा बोर्ड के सदस्य सईद अंसारी आदि उपस्थित थे।

 

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