छपी-अनछपी: भागवत की ‘समान जनसंख्या नीति’, ज़ुबैर-प्रतीक नोबेल प्राइज की संभावित लिस्ट में

 

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का जनसंख्या संबंधी बयान खबरों में छाया हुआ है। दशहरे की छुट्टी की वजह से आज भी अखबार नहीं आए हैं लेकिन दिल्ली से जो अखबार छपे हैं उनमें प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी भाषण भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ है। दशहरे के दिन राजनीति की खबरें अखबारों में छाई हुई है। मुंबई में हिंदुत्व के झंडाबरदार शिवसेना के दो धड़ों में घमासान मचा रहा जिसमें उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने एक दूसरे को गद्दार बताया। इन खबरों को मिलाकर नवभारत टाइम्स की सुर्खी बनी है: विजयादशमी की बिसात और राजनीति की बात। 

एक और जहां मोहन भागवत के बयान को इतनी तवज्जो दी गई है वहीं मेनस्ट्रीम हिंदी मीडिया की वेबसाइट्स पर एक प्रमुख खबर गायब है जो सोशल मीडिया पर छाई हुई है। यह खबर है ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए संभावित लिस्ट में शामिल होना। फेक न्यूज़ के फैक्ट चेकिंग के लिए उनकी पहचान अब दुनिया भर में मशहूर हो गयी है। हालांकि इस बारे में नवभारत टाइम्स ने अपने अंदर के पन्ने पर खबर दी है जिसकी सुर्खी है: नोबेल शांति के दावेदारों में 3 भारतीयों के नाम भी। यह खबर टाइम मैगजीन की सूचना पर आधारित है। इसमें तीसरा नाम सांप्रदायिक सौहार्द के लिए काम करने वाले प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर का है।

इस बीच केमिस्ट्री के लिए तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। हिंदुस्तान के अनुसार: रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार इस बार अमेरिका की कैरोलिन आर बर्टोज्जी, डेनमार्क के मोर्टन मेल्डल और अमेरिका के के. बैरी शार्पलेस को मिलेगा। समान भागों में अणुओं के एक साथ विखंडन का तरीका विकसित करने के लिए तीनों वैज्ञानिकों का चयन किया गया है। नवभारत टाइम्स ने बताया है कि इस खोज से कैंसर व प्लास्टिक से होने वाली समस्या से निजात मिलेगी। 

बिहार के सबसे बड़े अखबार हिंदुस्तान के दिल्ली संस्करण की पहली खबर है: डबल इंजन सरकार से ही फायदा: मोदी। श्री मोदी ने यह बात हिमाचल प्रदेश में एम्स अस्पताल के उद्घाटन के दौरान कही। 

मोहन भागवत के दशहरा बयान पर अमर उजाला की सुर्खी है: देश में बने समग्र जनसंख्या नीति सब पर समान रूप से लागू हो: संघ प्रमुख। इस बार नागपुर स्थित संघ कार्यालय में दशहरा उत्सव की मुख्य अतिथि थीं एवरेस्ट फतह करने वाली संतोष यादव। संतोष यादव को मोहन भागवत द्वारा सम्मानित किए जाने की तस्वीर भी प्रमुखता से छपी है।

नवभारत टाइम्स की लीड के तहत 3 खबरें हैं। 1. महिला समानता, जनसंख्या के मुद्दे उठाए भागवत ने। 2. मोदी ने चलाए चुनावी तीर, दशहरा प्रोग्राम में शामिल हुए। 3. शिव सेना vs शिवसेना का मुंबई में शक्ति प्रदर्शन।

दशहरे के दिन ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपना भाषण दिया। जम्मू कश्मीर के बारामूला में दिए गए भाषण पर नवभारत टाइम्स की सुर्खी है: शाह ने दो टूक कहा, पाकिस्तान से कोई बात नहीं की जाएगी। इस खबर की हेडलाइंस हिंदुस्तान में है: देश में कश्मीर को सबसे शांत जगह बनाएंगे। 

भारत में बनने वाली खांसी की 4 दवाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खतरनाक बताया है। हिंदुस्तान में इसकी हेडलाइन है: खांसी की 4 दवाओं पर डब्ल्यूएचओ का अलर्ट। अमर उजाला में इसके बारे में जानकारी दी गई है कि हरियाणा की दवा कंपनी मैडेन की दवाओं से गांबिया में 66 बच्चों की मौत की खबर दी गई है। 

हिंदुस्तान ने खबर दी है: दुबई में आमजन के लिए खुला मंदिर। इसमें बताया गया है कि जेबेल अली गांव में वहां के मंत्री और भारत के राजदूत संजय सुधीर में इस मंदिर का उद्घाटन किया। इस गांव में पहले से सात गिरजाघर और एक गुरुद्वारा हैं। 

अनछपी: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सेक्युलर भारत के किसी संवैधानिक पद पर नहीं है लेकिन उनके बयानों का मतलब आजकल सरकार की आनेवाली नीति होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मंत्रिमंडल के कई सदस्य आरएसएस के सीधे संपर्क में रह चुके हैं। संघ प्रमुख का भाषण अब सरकारी टीवी दूरदर्शन पर सीधा प्रसारित होता है। मीडिया में भी मोहन भागवत के बयान को प्रमुखता इसलिए दी जाती है कि उनकी विचारधारा के संपादक और मालिक यही चाहते हैं। एक दशक पहले तक संघ के प्रमुख की बातों को इतना प्रचार नहीं मिलता था। अब तो बीबीसी जैसे प्रसारक भी इसे प्रमुखता से कवर करते हैं। यह अकारण नहीं है।

मोहन भागवत ने अल्पसंख्यकों से खासकर मुसलमानों से संवाद कायम रखने की बात की है लेकिन वह किस तरह के लोगों से संवाद कायम करना चाहते हैं, यह देखना भी जरूरी है। वह ऐसे लोगों से मिलना चाहते हैं जो संघ की विचारधारा से समझौता करने के लिए तैयार हों। ऐसे ही समझौतावादी मुसलमानों में एक पूर्व चुनाव अध्यक्ष डॉ एस वाई कुरैशी भी हैं जिन्होंने जनसंख्या और मुसलमानों के विषय पर पुस्तक लिखी है। श्री कुरैशी ने भागवत की जनसंख्या संबंधी बात का यह कहकर स्वागत किया है कि इसमें सभी के लिए बात की गई है। दूसरी ओर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि श्री भागवत जब सब का डीएनए एक बताते हैं तो फिर इसके लिए जनसंख्या नीति में समुदाय और धर्म का जिक्र क्यों। 

 

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