छ्पी-अनछ्पी: यदुवंशी पर भाजपा व लालू में भिड़ंत, बालू माफिया ने दरोगा को ट्रैक्टर से कुचला

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। गोवर्धन पूजा पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद के बीच यदुवंशियों को लेकर बयानों की जंग हुई। इस विषय को सभी अखबारों ने अच्छी कवरेज दी है। जमुई में बालू माफिया द्वारा एक दरोगा को ट्रैक्टर से कुचलना की खबर भी प्रमुखता से छपी है।

हिन्दुस्तान के अनुसार मंगलवार को गोवर्धन पूजा पर बिहार में यदुवंश पर दावेदारी का सियासी संग्राम छिड़ गया। भाजपा ने पहली बार नित्यानंद राय को आगे कर गोवर्धन पूजा पर यदुवंशियों का मिलन समारोह बापू सभागार में आयोजित किया, जबकि लालू प्रसाद ने श्रीकृष्ण चेतना समिति की ओर से इस्कॉन मंदिर में आयोजित गोवर्धन पूजा समारोह में शिरकत की। लालू प्रसाद ने भाजपा की पहल को यदुवंश को खंडित करने की साजिश करार दिया, वहीं नित्यानंद राय ने कहा कि लालू प्रसाद को सिर्फ अपने परिवार की चिंता है।

यदुवंशियों को भय का प्रतीक बना दिया”

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नित्यानंद राय ने कहा है कि यादवों की पहचान रक्षक के रूप में है, लेकिन लालू राज में यदुवंशियों को भय का प्रतीक बना दिया गया। बिहार में मात्र 1.4 फीसदी यादवों को सरकारी नौकरी है। इसके लिए लालू-राबड़ी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो गोहत्या पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार गठन होने के बाद भाजपा पहला निर्णय यही लेगी।

“यदुवंश को बांटने की साज़िश”

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा है कि यदुवंशियों को खंडित करने की साजिश चल रही है। इसके लिए भाजपा और इसमें शामिल यादव समाज के नेताओं नित्यानंद राय, रामकृपाल यादव समेत अन्य को मुख्य रूप से दोषी ठहराया और कहा कि ये दोनों मिलकर यादवों की शक्ति को खंडित कर रहे हैं। इनकी साजिश को किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देंगे। एकजुट होकर समाज को बचाए रखना है। वे मंगलवार को इस्कॉन मंदिर के सभागार में श्रीकृष्णा चेतना समिति की तरफ से आयोजित गोवर्धन पूजा समारोह को संबोधित कर रहे थे।

दारोगा को ट्रैक्टर से कुचला

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: बालू लदे ट्रैक्टर से दरोगा को रौंदा, बलिदान। भास्कर की सबसे बड़ी सुर्खी है: बालू उठाने से रोका तो माफियाओं ने दरोगा को ट्रैक्टर से रंग कर मार डाला। जमुई जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र के रोपाबेल इलाके में मंगलवार सुबह आठ बजे बालू लदे ट्रैक्टर ने दारोगा प्रभात रंजन को कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। इसका आरोप महुलियाटांड़ के रेहड़ी टोला निवासी कृष्णा रविदास पर लगा है। सूचना पर पहुंची पुलिस बदहवास पड़े दारोगा प्रभात रंजन को सदर अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना में साथ रहे होमगार्ड जवान राजेश कुमार भी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। दारोगा वैशाली जिले के पातेपुर प्रखंड अंतर्गत बलिगांव थाना क्षेत्र स्थित खोवाजपुर गांव के रहने वाले थे।

ग़ज़ा पर हमास का नियंत्रण खत्म होने का दावा

जागरण ने खबर दी है कि ग़ज़ा में इसराइल हमास युद्ध मंगलवार को 39 वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच इसराइल के रक्षा मंत्री योएव गैलेंट ने दावा किया है कि हमास ने ग़ज़ा पट्टी में नियंत्रण को दिया है। इसराइली बल ग़ज़ा शहर पर पूरी तरह कब्जा करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते दबाव से हमास दक्षिण की ओर भागने की ओर मजबूर हुआ है। इस बीच ग़ज़ा में भारी बारिश जारी है और इसे फलस्तीनियों की परेशानी और बढ़ गई है।

 हमास की संसद पर झंडा फहराया: इसराइल

हिन्दुस्तान के अनुसार इसराइली सेना ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की है, जिसमें इसराइली सैनिक हमास की संसद पर देश का झंडा लहराते नजर आ रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में सैनिक स्पीकर की कुर्सी पर बैठे हैं। इसराइली सेना के प्रवक्ता ने घोषणा की कि सेना ने इनक्यूबेटरों को गाजा शहर के अल-शिफा अस्पताल में ट्रांसफर करने की पेशकश की है। तीन दिनों में 32 मरीजों की मौत हो चुकी है।

संघ बनाने पर नियुक्ति पत्र कैंसिल

भास्कर की खबर है: बीपीएससी अध्यापक संघ बनाना महंगा पड़ा, मधुबनी में शिक्षिका का नियुक्ति पत्र कैंसिल। मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड की रखवारी पंचायत की शिक्षिका बबीता कुमारी उर्फ बबीता चौरसिया को बीएससी अध्यापक संघ बनाना महंगा पड़ गया। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने इसे नोटिस कर लिया। बबीता के प्रोविजनल नियुक्ति पत्र को कैंसिल कर दिया गया। इसके साथ ही पंचायत शिक्षिका के नियोजन पर भी तलवार लटक रही है। अपर मुख्य सचिव के पाठक ने डीईओ संजय कुमार को कार्रवाई का निर्देश दिया था।

सहारा समूह के संस्थापक का निधन

सहारा इण्डिया परिवार के मुखिया सुब्रत राय सहारा का मंगलवार को मुम्बई के एक निजी अस्पताल में देहांत हो गया। वह लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। वह 75 वर्ष के थे। बिहार के अररिया जिले में 10 जून 1948 को जन्मे सुब्रत राय ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

कुछ और सुर्खियां

  • किसानों को राहत अब 0% ब्याज पर केसीसी से खेती के लिए लोन मिल सकेगा
  • बिहार में डेंगू मरीजों की संख्या 19000 के पार, पटना में 8000 से अधिक
  • महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले में डाबर समूह के अध्यक्ष व डायरेक्टर पर भी केस
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रांची में रोड शो, आज बिरसा मुंडा के गांव जाएंगे
  • सेप्टिक टैंक में दम घुटने से बिहार के चार मजदूरों की सूरत में मौत

अनछ्पी: जातिवाद की राजनीति नहीं करने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी आजकल अलग-अलग जातियों पर अपना दांव चल रही है। बिहार में 21000 यदुवंशियों को पार्टी में शामिल करने का दावा करने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने यादवों पर अपने डोरे मजबूती से डालने शुरू कर दिए हैं। इस काम के लिए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता नित्यानंद राय को लगाया गया है। नित्यानंद राय ने अपने भाषण में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी निशाना बनाया। श्री राय ने लालू प्रसाद के बारे में कहा कि उन्हें यादवों से कोई मतलब नहीं है, उन्हें केवल अपने परिवार से मतलब है। उन्होंने लाल द्वारा राबड़ी यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने का मुद्दा भी उठाया और पूछा कि राजद के किसी योग्य यादव नेता को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया। श्री राय को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें गृह राज्य मंत्री बनाने का सकारात्मक संदेश गया है और इस कारण यादवों की भीड़ उमड़ी है। श्री राय की इन बातों के बाद यह कैसे कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी जातिवाद की राजनीति नहीं करती है। इत्तेफाक है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने भी यदुवंशियों की राजनीति के बारे में बात की और कहा कि उन्हें बांटने की साजिश चल रही है जिसमें भाजपा और उसमें शामिल यादव नेता लगे हुए हैं। उन्होंने नित्यानंद राय के अलावा रामकृपाल यादव को भी इसके लिए दोषी ठहराया और कहा कि यह दोनों मिलकर यादवों की शक्ति को खंडित कर रहे हैं। भाजपा के यदुवंशी सम्मेलन पर कटाक्ष करते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि उसमें कंस का जुटान हुआ है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार सरकार श्रीकृष्ण के बताएं मार्ग पर चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गद्दी पर बैठने के लिए भाजपा नेता कृष्ण भगवान का दुरुपयोग कर रहे हैं। इतना तो तय है कि यादवों की राजनीति पर लालू प्रसाद यादव के आगे कोई नहीं टिकता है। यह भी निश्चित है कि भारतीय जनता पार्टी को उसी की भाषा में जवाब देने की कला में लालू प्रसाद का कोई जोड़ नहीं है। लेकिन लालू प्रसाद स्वास्थ्य के कारण राजनीतिक गतिविधियों में उतना हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। यह देखना रोचक होगा कि क्या भारतीय जनता पार्टी आगे भी यदुवंशियों को लक्ष्य बनाकर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है या बस यह एक बार का मामला है।

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