छपी-अनछपी: ठंड बढ़ने से बढ़े ब्रेन हैमरेज के मरीज, साल के पहले ही दिन जम्मू में आतंकी हमला

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। देश के बाक़ी हिस्सों में नए साल का जश्न मनाए जाने की खबरों के बीच जम्मू में आतंकी हमले की खबर आज के अखबारों में प्रमुखता से छपी है। इधर ठंड बढ़ने के कारण ब्रेन हेमरेज और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में भी इजाफा दर्ज किया गया है। कोरोना के भयंकर फैलाव के बीच चीन से खबर आई है कि वहां नए वर्ष पर बड़े पैमाने पर जश्न मनाया गया है।

जागरण की पहली खबर है: राजौरी में आतंकियों की गोलीबारी, चार की मौत। भास्कर की हेडलाइन है: जम्मू हिंदुओं के घरों में घुसे आतंकी, अंधाधुंध गोलियां चलाईं, चार लोगों की मौत। जागरण लिखता है: जम्मू संभाग में नए साल के पहले दिन आतंकियों ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का षड़यंत्र रचा और सीमा पर बसे राजौरी जिले में रविवार को डांगरी गांव में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी कर 4 हिंदुओं की हत्या कर दी। हमले में 10 अन्य को भी गोलियां लगी हैं। यह घटना रविवार देर शाम करीब 7:15 बजे की है।

कोहरे का असर

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: बिहार में कोहरे का असर पटना में सुबह 4 बजे दृश्यता 25 मीटर, पारा 9 डिग्री, बढ़ेगी ठंड। प्रभात खबर की सुर्खी है: कोहरे में अभी दिन भी खोया रहेगा। दक्षिण मध्य बिहार में ज्यादा सर्दी और उत्तर पूर्व में कम पड़ेगी ठंड। भास्कर लिखता है: पटना, गया, भागलपुर और पूर्णियां में सबसे अधिक कोहरा छाया रहा। पटना में सुबह 4 बजे 25 मीटर तक देखना मुश्किल था और उस समय तापमान छह डिग्री था। इस दौरान नौ से 11 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ठंडी पछुआ हवाओं से कनकनी का अहसास हो रहा था। कोहरे के कारण मगध एक्सप्रेस।7 घंटे लेट पहुंची।और जाने में भी इसे 6.5 घंटा की देर हुई। इसके अलावा पटना की पहली फ्लाइट 12:15 बजे उतर सकी।

नए साल का जश्न

हिन्दुस्तान की पहली खबर है: ठंड व कोहरे पर नए साल का उत्साह भारी। नववर्ष के जश्न के लिए मंदिरों, होटलों और पर्यटन स्थलों पर लोगों की भीड़ उमड़ी रही पटना समेत राज्य के अधिकतर शहरों में सड़क पर भीषण जाम लगा रहा। इसके साथ यह बताया गया है कि 10 जिलों में तापमान अभी 10 डिग्री से नीचे रहेगा। इसकी वजह से पटना में 7 जनवरी तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं जबकि दूसरे जिलों में भी स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

जजों की नियुक्ति में पिछड़ा वर्ग कहां?

हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर यह खबर दी है: पांच वर्षों में पिछड़े समुदायों से 15 प्रतिशत जज नियुक्त हुए। अखबार के अनुसार: उच्च न्यायालयों में पिछले पांच वर्षों में नियुक्त न्यायाधीशों में से 15 फीसदी से थोड़ा अधिक पिछड़े समुदायों से हैं। यह जानकारी न्याय विभाग ने एक संसदीय समिति को दी। विभाग ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में न्यायपालिका की प्रधानता के तीन दशकों के बाद भी यह समावेशी और समाजिक रूप से विविध नहीं बन पाया है। विभाग ने साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के प्रस्तावों की शुरुआत कॉलेजियम द्वारा की जाती है, इसलिए अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक और महिलाओं के बीच से उपयुक्त उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करके सामाजिक विविधता के मुद्दे को हल करने की प्राथमिक ज़िम्मेदारी उसकी बनती है। प्रभात खबर ने 2018 से 2022 तक विभिन्न हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की सूची देते हुए बताया है कि अनुसूचित जनजाति के 13% अनुसूचित जाति के 2.8% ओबीसी वर्ग के 11% और अल्पसंख्यक 2.6 प्रतिशत जज बने हैं।

ब्रेन हैमरेज के मामले बढ़े

भास्कर की खबर है: आईजीआईएमएस: 5 दिन में ब्रेन हैमरेज के 20 मरीज भर्ती। मेडिकल सुपरिन्टेन्डेन्ट डॉक्टर मनीष मंडल ने बताया कि इनमें से अधिकतर ने टीबी की दवा छोड़ दी थी या गलती से दवा नहीं ले सके थे। सभी को आइसीयू में रखा गया है। इसके अलावा सर्दी, खांसी, अस्थमा, बुखार, कोल्ड डायरिया और हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। बच्चे निमोनिया से भी पीड़ित मिल रहे हैं। इस मौसम में जो मरीज आ रहे हैं उनमें अधिकतर में बीपी और शुगर का लेवल बढ़ा मिल रहा है। पीएमसीएच के सीनियर फिजिशियन डॉक्टर बीके चौधरी का कहना है कि ठंड में बीपी और शुगर की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। दोनों को नियंत्रित रखने पर 80 फीसदी बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। अमूमन लोगों का बीपी बढ़ा रहता है और उनको इसकी जानकारी नहीं होती। इससे ब्रेन हैमरेज या हार्ट अटैक का शिकार होना पड़ता है। इस बारे में राजवंशी नगर अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉक्टर सारस्वत कुमार का कहना है कि बीपीया चोट से मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली नली से खून बहे तो ब्रेन हेमरेज कहलाता है और इस नली में किसी कारण ब्लॉकेज आ जाए तो इसे स्ट्रोक कहते हैं। दोनों में ही लकवा के लक्षण होते हैं।

अन्य सुर्खियां

  • आग को हीटर मिला और चिंपांजी ने ओढ़ा कंबल (पटना चिड़ियाघर)
  • दिल्ली में पहिए में फंसी युवती को 8 किलोमीटर घसीटा
  • हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह पर यौन उत्पीड़न का मामला, छोड़ा विभाग
  • बिहार में बेरोजगारी दर 19.1%
  • 4 साल से उर्दू अकादमी में सचिव नहीं, एक साल से मदरसा बोर्ड चेयरमैन का पद खाली
  • आंध्र प्रदेश में चंद्र बाबू के कार्यक्रम में फिर भगदड़, तीन मरे
  • चीन की सड़कों पर 9 वर्ष के स्वागत को उमड़ी भीड़
  • सात से जाति गणना नूतन राजधानी अंचल के वीआईपी इलाके से होगी शुरू

अनछपी: हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति कि जो जानकारी मिली है वह बहुत ही चिंतनीय है। बाकी क्षेत्रों में इस असमानता को रिजर्वेशन से दूर किया जाता है लेकिन अदालतों में जजों की नियुक्ति पर सरकार का सीधे कोई नियंत्रण नहीं होता और इसे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के जरिए तय करता है। अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक वर्ग से 3% से भी कम लोग जज बने हैं और यह किसी भी तरह एक स्वस्थ समाज के लिए स्वस्थ बात नहीं मानी जा सकती है। ऐसे में यह जरूरी जान पड़ता है कि या तो कॉलेजियम में कोई ऐसी व्यवस्था हो जिससे दूसरे वर्गों का प्रतिनिधित्व जज बनने में बढ़े या कॉलेजियम को समाप्त कर कोई और व्यवस्था लागू की जाए। कॉलेजियम को समाप्त करने का सुप्रीम कोर्ट सख्ती से विरोध करता है हालांकि वर्तमान सरकार के कानून मंत्री कई बार इस मुद्दे को सामने ला चुके हैं। यह बात भी अपनी जगह सही है कि कॉलेजियम को हटाने के बाद अगर सरकार जजों की नियुक्ति में सीधे दखल देती है तो फिर दूसरी तरह की समस्या पैदा होगी और एक ही विचारधारा के लोगों की नियुक्ति जजों के रूप में होने की आशंका बढ़ जाएगी। फिलहाल जरूरत इस बात की है कि ओबीसी और अल्पसंख्यकों के साथ-साथ एससी एसटी के जजों की संख्या भी पर्याप्त मात्रा में बढ़ाने के उपाय किए जाएं।

 

 

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