छपी-अनछपी: नगर निकाय चुनाव की अंतिम बाधा भी दूर, इंटर एक व मैट्रिक परीक्षा 14 फरवरी से

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में नगर निकाय चुनाव से खतरा वैसे तो पहले ही टल चुका था लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इसकी अंतिम बाधा भी दूर हो गयी। इससे संबंधित खबरें प्रमुखता से ली गई हैं। राज्य में इंटरमीडिएट और मैट्रिक की परीक्षाओं की तारीख का ऐलान हो चुका है। इसे सभी अखबारों ने प्रमुख जगह दी है। विश्व कप फ़ुटबॉल के क्वार्टर फाइनल में ब्राजील और हॉलैंड की हार की खबरें भी प्रमुखता से ली गई हैं। शुक्रवार को शुरू हुए संसद के सत्र में कॉमन सिविल कोर्ट को लेकर मचे हंगामे की खबर भी सभी अखबारों में है।

प्रभात खबर की पहली खबर है: इंटर की परीक्षा एक और मैट्रिक 14 फरवरी से 1 अप्रैल के पहले सप्ताह तक आएगा रिजल्ट। यह खबर हिंदुस्तान और जागरण में भी लीड है। बिहार बोर्ड ने पहली बार वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी किया है। मैट्रिक,इंटरमीडिएट के साथ ही शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एसटीइटी के कार्यक्रम भी घोषित किए गए हैं। बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि इंटर परीक्षा 2023 का आयोजन 1 से 11 फरवरी तक और मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 14 से 22 फरवरी तक ही जाएगी।

बदलाव का सुपर सक्सेस फॉर्मूला!

भास्कर की लीड है: बदलाव का सुपर सक्सेस फॉर्मूला अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है भाजपा। अखबार लिखता है: गुजरात में भाजपा ने चुनाव से 14 महीने पहले सीएम समेत सभी 22 मंत्री बदल डाले थे। साथ ही उसने पांच मंत्री, पूर्व सीएम, डिप्टी सीएम और 38 विधायको के टिकट काटे थे और इस तरह 182 सीटों में से 103 पर नए चेहरे उतारे थे। अखबार ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में  अगले साल होने वाले चुनाव के बारे में भी ऐसे ही बदलाव की बात लिखी है।
नगर निकाय चुनाव: अंतिम बाधा भी दूर
प्रभात खबर ने नगर निकाय चुनाव के बारे में यह खबर दी है: अंतिम बाधा भी दूर, अब तय समय पर ही नगर निकाय चुनाव। जागरण की सुर्खी है: नगर निकाय चुनाव में कोई बाधा नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा 20 जनवरी को होगी सुनवाई। अखबारों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में नगर निगम चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।  याचिकाकर्ता सुनील कुमार की ओर से पेश वकील राहुल भंडारी ने शुक्रवार को न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जेके माहेश्वरी की पीठ के समक्ष नगर निगम चुनाव पर रोक लगाने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि इस मामले पर सुनवाई 20 जनवरी 2023 को होनी है सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। ऐसे में राज्य के 224 नगर निकायों के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।

ब्राज़ील और हॉलैंड पेनल्टी शूट में हारे
कतर में चल रहे विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट में शुक्रवार की रात मजबूत मानी जा रही ब्राजील की टीम क्रोएशिया के हाथों पेनाल्टी शूटआउट में हार गई और इस तरह उसका विश्वकप का सफर पूरा हुआ। दूसरी और अर्जेंटीना ने हालैंड को भी पेनल्टी शूटआउट में हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। ब्राज़ील क्रोएशिया के मैच में निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें गोल रहित बराबरी पर थी। अतिरिक्त 30 मिनट में पहले ब्राजील ने एक गोल दागा लेकिन अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ में क्रोएशिया ने गोल कर बराबरी कर ली। इसके बाद हुए पेनाल्टी शूटआउट में क्रोएशिया ने 3-2 से जीत हासिल कर ली। इसी तरह अर्जेंटीना हॉलैंड के मुकाबले 2-2 से बराबरी पर छूटने के बाद पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना ने 4-3 से जीत हासिल की।

कॉमन सिविल कोड पर हंगामा
जागरण की एक महत्वपूर्ण हेडिंग है: समान नागरिक संहिता पर गरमाई संसद। अखबार के अनुसार विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे के बीच भाजपा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा ने समान नागरिक संहिता पर राज्यसभा में निजी विधेयक पेश कर दिया। भाजपा के ही एक अन्य सांसद हरनाथ सिंह यादव ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए शून्यकाल में नोटिस दे दिया। इसके बाद उच्च सदन में स्पष्ट राजनीतिक विभाजन नजर आया। तृणमूल कांग्रेस, एमडीएमके, राजद, समाजवादी पार्टी, भाकपा एवं माकपा, राकांपा और कांग्रेस ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। इन पार्टियों का कहना था कि यदि विधेयक को पारित होने दिया गया तो यह सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर देगा। देश में प्रचलित अनेकता में एकता की भावना भी इससे प्रभावित होगी। विपक्षी सांसदों ने किरोड़ी लाल मीणा से इस विधेयक वापस लेने की मांग की। इस पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मत विभाजन का निर्देश दिया। विधेयक पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 63 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 23 सदस्यों ने मतदान किया। पहला मौका है जब राज्यसभा में समान नागरिक संहिता पर विधेयक पेश किया गया है।

बीपीएससी का नया फॉर्मेट
प्रभात खबर यह सूचना प्रमुखता से दी है: बीपीएससी ने पहली बार जारी किया मुख्य प्रवेश परीक्षा के प्रश्न का फिक्स्ड फॉर्मेट, बताया- किस सेक्शन में किस तरह के पूछे जा सकते हैं प्रश्न। जागरण की सुर्खी है: बीपीएससी 67 वें में बदलाव, हर सेक्शन का पहला प्रश्न होगा अनिवार्य।

कोर्ट की महत्वपूर्ण खबरें
हिन्दुस्तान ने यह खबर प्रमुखता से दी है: कॉलेजियम की बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं: सुप्रीम कोर्ट। 12 दिसंबर 2018 को हुई कॉलेजियम की बैठक की जानकारी का आरटीआई अधिनियम के तहत खुलासा करने का अनुरोध करने वाली याचिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम बहुसदस्यीय है। उसके संभावित फैसले को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक जुलूसों को दंगों की वजह बताना गलत है। जागरण ने सुर्खी लगाई है: सभी धार्मिक जुलूसों को दंगों के स्रोत के रूप में चित्रित न करें: सुप्रीम कोर्ट। ऐसे जुलूस ओं के सख्त नियम की मांग संबंधी एनजीओ की जनहित याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश पी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि यह कानून व्यवस्था का मुद्दा है और उसे राज्यों की पुलिस व जिलाधिकारी देख सकते हैं। गैर सरकारी संगठन सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस द्वारा दाखिल इस याचिका में देश भर में धार्मिक जुलूसों  के नियमन के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग की गई थी।
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने सभी धर्मों की लड़कियों कि विवाह की न्यूनतम आयु 18 साल निर्धारित करने की राष्ट्रीय महिला आयोग की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। महिला आयोग ने मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के तहत लड़कियों की विवाह योग आयु बढ़ाने की भी अपील की है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने इस याचिका पर शुक्रवार को नोटिस जारी किया है।
अनछपी: ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी को हर चुनाव से पहले कोई ऐसा विवादित मुद्दा तलाशना होता है जिससे यह संदेश जाए कि वह मुसलमानों को सबक़ सिखाने में लगी है और इस तरह वह धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ाने में कामयाब हो जाए। समान नागरिक संहिता या कॉमन सिविल कोड एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में यह तो नहीं कहा जा सकता कि भारतीय जनता पार्टी ने इसे अभी लाया है क्योंकि यह उसके एजेंडे में लंबे समय से रहा है। लेकिन यही बात महत्वपूर्ण है कि लंबे समय से रहे एजेंडे को किस समय बाहर लाना है। हालांकि कॉमन सिविल कोर्ट का कोई फॉर्मेट अभी सामने नहीं आया है लेकिन बिना कहे यह बात पता है कि भारतीय जनता पार्टी इसमें किस तरह के कानून लाएगी। ध्यान देने की बात यह है कि भारत में वैसे ही अधिकतर मामलों में समान सिविल कोड लागू है। बस व्यक्तिगत मामले जैसे शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति का बंटवारा आदि ऐसे कुछ मामले हैं जहां सबको अपने धर्म के अनुसार चलने की अनुमति है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उनको यह आशंका है कि समान नागरिक संगीता के नाम पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के पर्सनल ला को समाप्त कर दिया जाएगा और बहुसंख्यक हिंदू समाज के कानूनों को सब प्रह्लाद आ जाएगा। इसलिए ऐसा लगता है कि विपक्षी सदस्यों ने जो आशंका जताई है उसके लिए मजबूत आधार मौजूद है।

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