छपी-अनछपी: कोहरे-कोल्ड डे से पूरा बिहार परेशान, जोशीमठ में दीवारों के साथ दरक रहे दिल

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। देश के अन्य हिस्सों की तरह बिहार में भी सर्दी, कोहरा आदि से परेशानी जारी है और उसकी खबरें भी। रेलवे चाहे जितना एंटीफॉग डिवाइस की बात करे, हालत यह है कि राजधानी जैसी ट्रेन 15-15 घंटे लेट चल रही है। आईएएस अफसर संजीव हंस और पूर्व एमएलए गुलाब यादव पर गैंगरेप की एफआईआर दर्ज होने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। उत्तराखंड के जोशीमठ में मकानों में दरारों के साथ लोगों के दिल भी दरक रहे हैं क्योंकि इस प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ उन्हें मानव जनित मुसीबत का भी सामना करना पड़ रहा है जिसकी कवरेज भी अच्छी है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: कोहरा ट्रेन-प्लेन सब बेपटरी। भास्कर की मेन हेडलाइन है: पूरे बिहार में कोल्ड डे का अलर्ट, 13 के बाद थोड़ी राहत पर फिर लौटेगी गलन। जागरण की सुर्खी है: धूप निकली, पर शीतलहर से राहत नहीं। हिन्दुस्तान लिखता है: बिहार सहित देश के अन्य भागों में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के कारण ट्रेन और विमान परिचालन पूरी तरह बेपटरी हो गई है। पिछले 15 दिनों से ट्रेनें लगातार विलंब से चल रही हैं। मंगलवार को पटना आने वाली 20 ट्रेनें घंटों लेट से पहुंचीं और चार को रद्द करना पड़ा। दिल्ली से पटना आने वाली 12310 तेजस राजधानी एक्सप्रेस 15 घंटे 30 मिनट की देरी से आई। वहीं पटना से जाने वाली 12309 तेजस राजधानी मंगलवार की जगह बुधवार की सुबह सात बजे करीब 12 घंटे की देरी से दिल्ली रवाना होगी। भास्कर लिखता है: पहाड़ों पर लगातार बर्फबारी जारी रहने से बिहार के सभी हिस्सों में इसका असर देखा जा रहा है। लगभग 26 जिलों में हल्की धूप निकल रही है लेकिन उसमें तपिश कम होने की वजह से ठंड से राहत नहीं है और अधिक दबाव के क्षेत्र व नमी 90% होने की वजह से कहीं घना तो कहीं पर हल्का कोहरा जारी है।

आईएएस-पूर्व एमएलए पर गैंग रेप की एफआईआर

आईएएस संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव पर एफआईआर दर्ज होने की खबर सभी अखबारों में है। अखबारों के अनुसार आईएएस अधिकारी संजीव हंस, पूर्व विधायक गुलाब यादव और पूर्व विधायक के नौकर के खिलाफ झांसा देकर दुष्कर्म की प्राथमिकी रुपसपुर थाने में मंगलवार को दर्ज कर ली गयी। दानापुर एसीजेएम कोर्ट ने इस मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया था। पीड़िता का आरोप है कि गुलाब यादव ने उसे महिला आयोग का सदस्य बनाने का झांसा दे वर्ष 2016 में रूकनपुरा स्थित अपने फ्लैट पर बुलाया था। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि पूर्व विधायक ने अश्लील वीडियो भी बनायी थी। वीडियो दिखाकर उसे ब्लैकमेल करते थे। पूर्व विधायक ने 8 जुलाई 2017 को उसे पुणे के एक होटल में बुलाया। महिला के आरोप के मुताबिक उस जगह आईएएस अधिकारी संजीव हंस भी मौजूद थे। उन्होंने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। इधर, एसएसपी सह डीआईजी डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि पुलिस कोर्ट के आदेश के बाद तीनों आरोपितों व महिला के बेटे के डीएनए का मिलान करवायेगी। साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

हर विज्ञापन पर फीस

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: हर विज्ञापन पर शुल्क वसूलेगा निगम। होर्डिंग व बैनर समेत सभी तरह के विज्ञापन के लिए जोन के हिसाब से निकाय को शुल्क देना होगा। राजधानी समेत राज्य के सभी शहरी निकायों में किसी भी जमीन, मकान, दीवार, होर्डिंग, संरचना या सार्वजनिक जगहों पर विज्ञापन लगाए जाने के लिए नगर निकाय में रजिस्ट्रेशन कराकर फीस जमा करना होगा।

शहला राशिद पर मुकदमा का रास्ता

शहला राशिद पर मुकदमा चलाने का रास्ता साफ होने की खबर कई जगह प्रमुखता से छपी है। सेना पर कथित रूप से विवादित ट्वीट के मामले में जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद पर मुकदमा चलाया जा सकेगा। दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने इसकी अनुमति दे दी है। उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि यह मामला शहला रशीद के खिलाफ 2019 में दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की शिकायत पर दिल्ली में विशेष प्रकोष्ठ थाने में उनके खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया था। शहला पर ट्वीट के जरिए विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने का आरोप है।

जोशीमठ में दर्द, सेना अलर्ट

भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी सुर्खी है: जोशीमठ; दर्द और गुस्सा फूटा। उत्तराखंड के जोशीमठ में मंगलवार सुबह से ही लोगों में गुस्सा था। पहले चरण में जिन लोगों के मकान तोड़े जाने थे, उनमें से कुछ लोग अपना सामान गाड़ियों में डाल रहे थे। बच्चे, महिलाएं, घरों को देखकर रो रहे थे। भू धंसाव के खतरे के देखते हुए पहले चरण में 75 मकान को गिराने की तैयारी थी। कार्रवाई के विरोध में लोग सुबह से ही तहसील परिसर में जमा हो गए। उनका कहना था कि तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले उनकी प्रॉपर्टी का मूल्यांकन ही नहीं किया गया है। मुआवजा तय किए बिना वे अपने घरों को तोड़ने नहीं देंगे। हिन्दुस्तान की खबर है: जोशीमठ में मकान तोड़ने पर रोक, अलर्ट पर सेना। जोशीमठ में जमीन धंसने और मकानों में दरारें आने के बाद राहत और बचाव के प्रयास तेज हो गए हैं। बढ़ते संकट को देखते हुए सेना और आईटीबीपी को अलर्ट मोड पर रखा गया है। इस बीच दरारग्रस्त दो होटलों को तोड़ने की जद्दोजहद मंगलवार को दिनभर चलती रही। लोग बिना नोटिस और मुआवजे का आकलन किए बगैर होटलों को तोड़ने के विरोध में उतर आए। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी गई।

कुछ और सुर्खियां

  • गांधी मैदान और एसके मेमोरियल हॉल की होगी ऑनलाइन बुकिंग
  • राशन विक्रेताओं की हड़ताल खत्म, आज से बंटेगा अनाज
  • आईआईटी दाखिले में बोर्ड के 75% अंक की बाध्यता हटी
  • 4000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्ताव को मंजूरी
  • प्रदेश में पंचायतों की 26 82 सीटों पर टल गया उपचुनाव
  • अब ऑनलाइन बुक करा सकेंगे हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, अलॉट होगा स्लॉट, 25 लाख गाड़ियों को लाभ
  • गया में कोर्ट ने हत्यारोपियों को दोषी करार दिया, कस्टडी में देर हुई तो दोनों फरार हुए
  • किडनी कांड एनएचआरसी ने डीजीपी और मुख्य सचिव से कहा- कार्रवाई करें
  • बिहार में 63% महिलाएं और 69% बच्चे कुपोषित, चलाया जा रहा पोषण अभियान

अनछपी: उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी प्रचारित किया जाता है लेकिन अफसोस की बात यह है कि वहां आम लोगों का जीवन हाल के दिनों में परेशानियों की वजह से चर्चा में रहा है। पहले हल्द्वानी के 50 हज़ार लोगों के सर से आशियाना छिनने का खतरा था तो सुप्रीम कोर्ट ने एक हद तक उन्हें राहत दी। पिछले कई दिनों से जोशीमठ और आसपास के इलाकों में मकानों, होटलों और अन्य बिल्डिंगों में दरार की खबरें आ रही हैं। इसके साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या हम विकास के ऐसे मॉडल को अपना रहे हैं जिससे लोगों का जीना दूभर हो सकता है। जोशीमठ में मकानों में आई दरारों के लिए वहां आसपास चल रहे प्रोजेक्ट को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। अब सरकार चाहती है कि दरार पड़े मकानों को तोड़ दिया जाए लेकिन जिन लोगों के वह मकान हैं उनका यह कहना है कि उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा जबकि उसकी नापी भी नहीं हो रही है। इंसानों की जिंदगी में आने वाली इसी परेशानी को बिना भेदभाव समझने की जरूरत है। ऐसा आरोप है कि हल्द्वानी में बड़े पैमाने पर प्रभावित होने वाले लोग मुसलमान थे इसलिए उत्तराखंड की सरकार ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ने का फैसला किया था। अब जोशीमठ और आसपास के इलाकों के लोग जब प्रभावित हो रहे हैं तो सरकार को यह बात समझ में आ रही होगी कि उसके ऐसे रवैया का जनता में कितना विरोध है। इसलिए विकास के मॉडल के साथ-साथ समाज के मॉडल पर भी ध्यान देने की जरूरत है और बिना भेदभाव भारत के हर नागरिक की मदद की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।

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