छपी-अनछपीः कारखाना लगाने के लिए जमीन की लीज सस्ती, निशाने पर सीएए विरोधी प्रदर्शनकारी

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। बुधवार के पटना के हिन्दी अखबारों में बिहार कैबिनेट की खबर लीड है। फुलवारी शरीफ में कथित तौर पर देश-विरोधी गतिविधि चलाने के मामले में मनी लाॅन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किये जाने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। इसके अलावा भास्कर में एक्सक्लूसिव बयान छपा हैः अब अल्पसंख्यक मंत्री जमां खान बोले- जो भी गलती करेगा, चाहे व पीएफआई हो या आरएसएस, उस पर कार्रवाई होगी।
हिन्दुस्तान की लीड हैः राज्य में बियाडा की जमीन 80 फीसदी तक सस्ती हुई। यही खबर भास्कर और जागरण की भी पहली खबर है। बियाडा 90 वर्ष की लीज पर जमीन देती है। अभी सरकार कारखाना लगाने के लिए जमीन एमवीआर यानी कम से कम कीमत के रजिस्टर के हिसाब से देती है। अब हर एकड़ पर लीज की रकम 7 करोड़ तक कम होगी। फिलहाल बियाडा की ऐसी 54 जमीन है।
प्रभात खबर की लीड हैैः किसानों को मिलेगा 60 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल पर अनुदान।
फुलवारी शरीफ में कथित तौर पर पीएफआई के नाम पर चल रही देश विरोधी गतिविधियों की ईडी जांच की खबर में दावा किया गया है कि पकड़े गये संदिग्धों ने विदेशों से चंदा इकट्ठा करने की बात स्वीकार की है। हिन्दुस्तान अखबार ने जानकारी दी है कि सीएए के विरोध-प्रदर्शनों में पीएफआई की भूमिका जांच कर रही है। अखबार ने यह बात नहीं लिखी है लेकिन फुलवारी के कई लोग बताते हैं कि पुलिस सीएए के विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को टारगेट कर रही है।
इस खबर की कड़ी में अब मोतिहारी का नाम भी आ गया है जहां ढाका और पलनवा थाना क्षेत्र में एनआईए की टीम ने छापेमारी की है। हिन्दुस्तान के अनुसार मदरसा जामिया मारिया निस्वां के शिक्षक मुफ्ती असगर अली को उठाया है। मुफ्ती असगर का घर पलनवा थाना के सिसवनिया में है। एनआईए ने मदरसा से जुड़े दो अन्य लोगों को भी लैपटाॅप से थाने पर बुलाया था लेकिन उनकी जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
भास्कर ने अपने दूसरे पेज की लीड खबर की हेडिंग में सबूत का सवाल उठाते हुए सुर्खी लगायी हैः पुलिस ने जिन्हें देशद्रोही बताया, उनकी जमानत की राह खुली छोड़ी। यह अखबार बार-बार आतंक की फुलवारी शब्दावली का प्रयोग कर रहा है।
कथित तौर पर ’गजवा-ए-हिन्द’ और ’डायरेक्ट जिहाद 2023’ व्हाट्सऐप ग्रुप चलाने के आरोप में पकड़े गये मुनीर काॅलोनी के मरगूब अहमद दानिश से एटीएस से पूछताछ की खबर भी प्रमुखता से छपी है।
फुलवारी मामले की जांच के लिए भाकपा-माले और इंसाफ मंच के जांच दल के दौरे की खबर हिन्दुस्तान को छोड़ हिन्दी अखबारों ने दबा दी है। इस दल ने दावा किया था कि पुलिस आरोपितों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी और एएसपी मनीष कुमार भी उसके सवालों का जवाब नहीं दे सके। जागरण और टाइम्स आॅफ इंडिया ने इसे बिल्कुल तवज्जो नहीं दी है।
टाइम्स आॅफ इंडिया की सबसे बड़ी खबर हैः ईडी ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर को फोन टैपिंग मामले में गिरफ्तार किया। ये फोन काॅल्स नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज के कुछ अधिकारियों और ग्राहकों की थीं।
हरियाणा के नूह से खबर है कि अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन रोकने गये तावरू के डीएसपी सुरेन्दर सिंह बिश्नोई को वहां के खनन माफिया ने ट्रक से कुचल कर मारा डाला। यह खबर टाइम्स आॅफ इंडिया और प्रभात खबर में पहले पेज पर है।
पटना के आलमगंज की बिस्कोमान काॅलोनी में कुछ खाने-पीने के बाद संदिग्ध स्थिति में दो युवकों की मौत की खबर भी प्रमुखता से छपी है।
अनछपीः बियाडा बिहार में कारखाने के लिए जमीन लीज देने के लिए जो नया आॅफर लेकर आया है, उसका लाभ लिया जा सकता है। इसमें परेशानी होती है लेकिन जब लीज की रकम में इतनी छूट है तो उस परेशानी को भी झेला जा सकता है। दूसरी तरफ सरकार को भी सोचना चाहिए कि बियाडा की जमीन को इतनी सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की जरूरत क्यों पड़ी। वास्तविकता यह है कि सरकार चाहे जितने दावे करे बिहार में उद्योग लगाना आसान काम नहीं है। इसमें सबसे बड़ी बाधा है यहां की लाल फीताशाही। सरकार कहती तो है कि एक ही विंडो पर सारा काम होगा लेकिन बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े लोग बताते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। एक ही काम के लिए बार-बार दौड़ाया जाता है। फिर भी उन वर्गों को जो उद्योग लगाने में बिल्कुल पीछे हैं, इस स्कीम का लाभ लेने के बारे में सोचना चाहिए।

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