छपी-अनछपीः कोलंबो में पीएम का घर फूंका, राष्ट्पति भागे, मंत्री ने कहा- मेरे विभाग पर माफिया का कब्जा

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। तमिल और मुसलमान अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत भड़का कर श्रीलंका पर राज करने वाले नेताओं को जिस संकट का सामना था, शनिवार को वह ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा।
गंभीर आर्थिक संकट झेल रहे श्रीलंका की हालत यह हो गयी कि प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने इस्तीफा दे दिया मगर विद्रोही जनता ने उनका घर फूंक दिय। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को उस वक्त अपना महल छोड़कर भागना पड़ा जब सुरक्षा बलों की तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों ने उसे घेर लिया और जबरन उसमें घुस गये। ऐसी खबरें आयी हैं कि राष्ट्रपति राजपक्षे 13 जुलाई को इस्तीफा दे सकते हैं।
हिन्दुस्तान की हेडिंग हैः कोलंबो में पीएम का घर फूंका, राष्ट्पति भागे। जागरण ने लिखा हैः श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों का राष्ट्पति भवन पर कब्जा।
जागरण ने पहले पेज पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत कुमार का बयान छापा है जिसमें उन्होंने कहा है, ’’मेरे विभाग पर माफिया का कब्जा है’’। मंत्री महोदय इसलिए नाराज हैं कि उनके विभाग में करीब डेढ़ सौ सीओ के तबादले को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्तर पर आठ जुलाई को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा है कि इसमें 80 विधायकों के आग्रह का सम्मान था। ऐसे तबादलों पर आम तौर पर आरोप लगता है कि इसमें घूसखोरी होती है लेकिन जाहिर है कि मंत्री इससे इनकार कर रहे हैं। सीओ आॅफिस में जाकर देखा जा सकता है कि वहां किस स्तर पर घूसखोरी होती है। आम लोग यह भी कहते हैं कि जब इतना घूस देकर कोई आएगा तो इस आॅफिस में घूसखोरी नहीं होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
अमरनाथ गुफा में तीर्थ यात्रियों के फंसे होने की खबर भी प्रमुखता से छपी है। हिन्दुस्तान ने लिखा हैः अमरनाथ हादसे में अब भी 48 लोग लापात, मरने वालों की संख्या हुई 16। जागरण ने लापता लोगों की संख्या 46 और फंसे श्रद्धालुओं की संख्या 15 हजार बतायी है।
पटना में 5 माह बाद एक ही दिन 218 नये कोरोना केस मिलने की खबर भी प्रमुखता से छपी है।
वैशाली में दो लोग खुद को टेक्नीशियन बताकर केनरा बैंक के एटीएम से पैसे निकाल कर चलते बने। यह खबर टाइम्स आॅफ इंडिया में पहले पेज पर छपी है। दोनों धोखेबाज कितने रुपये ले गये, इसका पता नहीं चल पाया है।
अनछपीः आज बकरईद है मगर आज के दिन भी घोर संघी और नफरती अखबार जागरण ने अपने संपादकीय पेज पर जिस रेखांकन के साथ आलेख छापा है वह बेहद दुर्भावनापूर्ण और निंदनीय है। खतरनाक रूप लेता अतिवाद- इस शीर्षक से छपे अखबार के मालिक संजय गुप्ता के इस आलेख में जो रेखांकन है उसमें एक दाढ़ी रखे इंसान की खोपड़ी खुली हुई है और उसमें तलवारें दिख रही हैं। यह आलेख नुपूर शर्मा के बयान पर मुसलमानों की आपत्ति पर आधारित है। जाहिर है कि उदयपुर की हिंसा की किसी मुस्लिम संगठन ने हिमायत नहीं की बल्कि सबने इसकी निंदा की मगर जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विवाद की जड़ में नुपूर का बयान है तो आलेख उस बयान की निंदा पर न होकर मुसमलानों को अतिवादी और हिंसक बताने पर केन्द्रित है। ऐसे आलेख से समाज में मुसलमानों के खिलाफ नफरत और बढ़ेगी। इस आलेख की शुरुआत में ही लिखा है कि ’’जो लोग यह फर्जी अभियान छेड़े हुए हैं कि भारत में मुसलमानों को सताया जा रहा है, उसके चलते भी मुस्लिम समाज में कट्टरता बढ़ रही है।’’ सवाल यह है कि मुसलमानों को सताने के लिए चल रहे अभियान को स्वीकार न कर इसकी शिकायत को ही फर्जी बताने की इस मानसिकता से समाज में क्या संदेश जाएगा। इससे समझा जा सकता है कि जागरण अखबार कैसे इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का माध्यम बन रहा है। ऐसे में इसके संपादक से मिलकर आपत्ति दर्ज कराना जरूरी है।

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