अब श्मशान घाटों का भी निजीकरण! भाकपा-माले ने कहा, ‘बेहद निंदनीय’

सैयद जावेद हसन, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना
रेलवे, एयरपोर्ट, बड़े-बड़े सरकारी कल कारखानों के निजीकरण की बात तो आपने सुनी होगी। कोरोनाकाल में अब श्मशान घाटों के निजीकरण की बात भी सामने आने लगी हैैै। बात पटना के तीन श्मशान घाटों के निजीकरण की हो रही है। भाकपा-माले के राज्य सचिव काॅमरेड कुणाल ने पटना नगर निगम द्वारा राजधानी के तीनों श्मशान घाटों के निजीकरण का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने निगम के इस फैसले को अविलंब वापस लेने की मांग की है।

कुणाल ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि अगर घाटों के संचालन में किसी प्रकार की दिक्कत आ रही है तो उसे ठीक करने की जरूरत है, न कि उसका निजीकरण कर देने का। इसे केंद्र
और राज्य सरकारों के द्वारा तमाम सरकारी संस्थानों के निजीकरण के प्रयासों की ही एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए जो इस कोविड काल में पूरी तरह अन्याय है।

दरअसल हाल के दिनों में ऐसी खबरें आई हैं कि पटना के बांसघाट, गुलबी घाट और खाजेकलां श्मशान घाटों की स्थिति दयनीय है। वहां अंतिम संस्कार वाली इलेक्ट्रिक मशीनें खराब पाई गईं। इसकी वजह से शवों के अंतिम संस्कार में परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई को घंटों इंतेजार करना पड़ रहा है। बिजली मशीन खराब रहने की वजह से लकड़ी से शवों का अंतिम संस्कार कराना पड़ रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से शवों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया है।

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